इस पुस्तक में "ईश्वर" को एक आध्यात्मिक वास्तविकता के रूप में दर्शाया गया है। इस वास्तविकता को किसी भी वैज्ञानिक पद्धति से जांचा-परखा नहीं जा सकता । परन्तु, मन की शांति, ईश्वर के प्रति अटूट आस्था एवं विश्वास, तथा प्रज्ञा जैसी व्यक्तिगत विधि द्वारा बड़ी आसानी से अनुभव किया जा सकता है। इतना ही नहीं, श्रद्धा, प्रबल इच्छा, एवं गहन ध्यान के द्वारा उनके मूलस्वरूप को महसूस कर उनका दिव्य-दर्शन भी किया जा सकता है। यह पुस्तक क्वांटम भौतिकी के सिद्धांत एवं अल्बर्ट आइंस्टीन के समीकरण पर आधारित है जो कहता है कि पर्यवेक्षण-शक्ति द्वारा "ऊर्जा को पदार्थ में तथा पदार्थ को ऊर्जा" में रूपान्तरित होते हुए देखा जा सकता है।